राष्ट्रीय हथकरघा दिवस क्या है?/Handloom day

 



राष्ट्रीय हथकरघा दिवस यह भारत मे हर वर्ष 7अगस्त को मनाया जाता है। हथकरघा यानि हाथ से चलाना,बनाना,इसकी शुरुआत 2015 से हुई। इसमे आत्म निर्भर भारत का संकल्प लेकर हथकरघा उद्योग को मजबूत करना।और लोकल फोर भोकल,भारत मे कृषि के बाद हथकरघा ही दूसरा रोजगार प्रदाता बडा़ क्षेत्र है। इसमे 35.22लाख कर्मचारी रजिस्टर्ड हैं।यह भारत मे लाखों लोगों को रोजगार उपलब्ध कराता है। भारत मे 2.38 लाख हथकरघे उद्योग हैं।इसमे 70 प्रतिशत के लगभग महिलायें हैं।इसमे 2015 के बाद 184 उत्पाद श्रेणियों हेतु 1590 रजिस्ट्रेशन हुए। इस क्षेत्र मे भारत प्रतिवर्ष लगभग 2000करोड़ रुपये का निर्यात करता है।हथकरघा दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य लघु और मध्यम उद्योग को बढावा देना है।बुनकर समाज का सम्मान और भारत के सामाजिक-आर्थिक विकास मे उनके योगदान को सराहना भी इस दिवस का उद्देश्य है।आज भारत मे हथकरघा से बनी वस्तुएं देश और विदेशों के कोने कोने में जा रही हैं।और इससे भारत को अलग पहचान भी मिल रही हैं।अपने देश के अंदर बुनकर समाज को भी आगे बढ़ने का मौका मिल रहा है। सन 1905लॉर्ड कर्जन ने बंगाल विभाजन की घोषणा की थी। इसका प्रतिकार करने के लिए कोलकाता के टाउन हॉल में एक जनसभा से स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत की गयी थी। इसी घटना की याद में हर साल 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाया जाता है भारत में हथकरघा उद्योग में बड़ी संख्या में लोग रोजगार में लगे हुए हैं।हथकरघा उद्योग में भारत में महिलाओं का बहुत बड़ा योगदान है आज भी लाखों महिलाएं हथकरघा उद्योग से जुड़ी हुई हैं। जिनको आत्मनिर्भर बनने का भी अवसर प्राप्त होता है। हमारे देश में ऐसे राज्य हैं जिनमें खासतौर से हथकरघा उद्योग बड़े पैमाने पर होता है। जैसे आंध्र प्रदेश की कलमकारी, तमिलनाडु का  कांजीवरम महाराष्ट्र की पैठनी, मध्यप्रदेश की चंदेरी, बिहार का भागलपुरी सिल्क,गुजरात की बांधनी, उत्तर प्रदेश के कालीन,जो भारत मे ही नहीं दुनिया भर में भी मशहूर है। हथकरघा क्षेत्र  अब भारत मे लगातार बृद्धि कर रहा है।और विदेशों को कई वस्तुओं को बडे़ पैमाने पर निर्यात भी कर रहा है।

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