ग्राम्य विकास

ग्राम्य विकास हेतु जरुरी उपाय

साक्षरता बढाना। स्वच्छता, स्वास्थ्य जागरूकता, सामाजिक समरसता, स्वावलम्बन हेतु प्रेरित करना, पर्यावरण, वृक्षारोपण,
स्वावलम्बन -स्थानीय स्तर पर - दूध डेरी, मौन पालन, बकरी पालन, भेडपालन, खरगोश पालन, बेकरी का कार्य, 
उत्तराखंड मे जैविक खेती, किसानों को नकदी फसलों का उत्पादन करने को प्रेरित करना जैसे-मंडवा, झंगोरा, मिर्च, हल्दी, अदरक, मोटी दालें,आदि।

वृक्षारोपण -फलदार वृक्ष,मौसमी,सेब,नींबू आंवला, नाशपाती, आदि। 

किसी भी गांव मे-न्याय ग्राम पंचायत द्वारा सुलभ हो। 
भारतीय जीवन पद्धति का दिग्दर्शन हो 

जैसे मन्दिर सामाजिक गतिविधि का केन्द्र  हो,और गांव एक परिवार भावना से खड़ा हो।

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